अक्टूबर 1950 में कोरिया जंग को शुरू हुए 4 महीने बीते थे। अमेरिकी एयरफोर्स के बी-29 और बी-51 बमवर्षक विमान नॉर्थ कोरिया में तबाही मचा रहे थे। अमेरिकी सेना नॉर्थ कोरिया की सेना को पीछे धकेलते हुए यालू नदी के किनारे पहुंच गई थी।
यह एक तरह से अमेरिकी सेना की चीन बॉर्डर पर दस्तक थी। इसके बाद शुरू हुई इस जंग की असली कहानी। जब चीन के सबसे बड़े नेता माओ त्से तुंग के इशारे पर 2 लाख से ज्यादा चीनी सैनिक एक साथ एक ही मोर्चे पर जंग में कूद गए। इसके बाद जंग की पूरी तस्वीर बदल गई और अमेरिका को भागना पड़ा।
आज ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका एक बार फिर आमने-सामने हैं। इससे पहले इन दोनों सुपर पॉवर्स के बीच सिर्फ एक बार जंग हुई है।
कोरियाई जंग में चीन से सीधे टकराया था अमेरिका
25 जून 1950 को नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया पर हमला कर दिया। इस हमले के साथ ही दुनिया के ताकतवर मुल्क दो धड़ों में बंट गए। एक तरफ चीन और सोवियत रूस, नॉर्थ कोरिया की कम्युनिस्ट सरकार के साथ खड़े थे। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोपीय देश साउथ कोरिया के साथ थे।