मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश के लोगों से भेंट-मुलाकात करने निकले हैं। सामान्य तौर पर यह कार्यक्रम सरकारी योजनाओं की नब्ज टटोलने का और जनता से सीधे मुलाकात करने का लगता है।इसका सेटअप भी ऐसा ही है, लेकिन जब मुख्यमंत्री बघेल अचानक किसी बूढ़े आदिवासी, उम्र दराज ग्रामीणों से वहां की जड़ी-बूटी, सब्जी-भाजी के गुणों की बात करने लगते हैं तो लगता है कि सीएम किसी और तलाश में भी हैं।
जब मैंने उनसे इस तरह की चर्चा के बारे में पूछा तो वे मुस्कुराते हुए बोले- जशपुर की चुनचुनिया भाजी में वो गुण है कि यदि उसकी चटनी रोज खाई जाए तो पेट की, शरीर की उष्णता कम कर देती है।अनिद्रा की बीमारी में यह बेहद कारगर है। ऐसे ही हमारे यहां ब्राह्मी भी बहुतायत में है, जो दिमाग तेज करने, याददाश्त बढ़ाने, डिप्रेशन दूर करने की सटीक दवा है। ऐसी तमाम जड़ी-बूटियों, फूल-पत्तियों की खेती को बढ़ाने, इसे प्रोसेस करने के लिए हम बड़ी कार्ययोजना लाने वाले हैं। सबसे अच्छी बात है, इनसे बनने वाली मेडिसिन का पहले से ही बड़ा मार्केट है।