उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के पीछे कुछ बाहरी लोग हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शुक्रवार को जामा मस्जिद के बाहर कुछ ऐसे लोग दिखाई दिए थे, जो यहां पहले कभी नजर नहीं आए थे। इन लोगों ने काला कुर्ता-पैजामा और नीली टोपी पहनी हुई थी। ये लोग कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर शराब पी रहे थे और मस्जिद से भीड़ के बाहर निकलते ही भड़काऊ नारे लगाने लगे। उसके बाद ही हिंसा भड़की।
स्थानीय लोगों को हिंसा का अंदेशा था
नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि गुरुवार को ही हम लोगों को अंदाजा हो गया था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों की तरफ से कुछ बड़ी प्लानिंग चल रही है। जिसकी स्क्रिप्ट हलवाई जान, नख्सा बाजार, लोहिनी सराय, कटपीस वाली गली में लिखी जा रही थी।
शुक्रवार को जुमे की नमाज से पहले काले कपड़े और नीली टोपी पहने करीब 50 युवक चौक फव्वारा पहुंच गए थे। यहां इन लोगों ने कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर शराब पी। जैसे ही नमाजी मस्जिद से बाहर आए। इन युवकों ने नारे-ए-तकबीर, अल्लाह हू अकबर के नारे लगाना शुरू कर दिए। इसके बाद अन्य युवक भी इनके साथ मिल गए और फिर देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या हजारों में बदल गई।