चरमपंथी इस्लामिक संगठन PFI की भूमिका कानपुर हिंसा में मिलने के बाद टेरर फंडिंग की जांच चल रही है। सुनियोजित साजिश के साक्ष्य भी सामने आ रहे हैं। उपद्रवियों ने 48 घंटे पहले ही शहर के प्रमुख पेट्रोल पंपों से बोतलों में पेट्रोल लिया, इकट्ठा किया और फिर उन्हीं का इस्तेमाल पेट्रोल बम तैयार करने के लिए किया।
कानपुर के डिप्टी पड़ाव के भारत पेट्रोलियम के पंप की CCTV फुटेज में उपद्रव के आरोपी बोतल में पेट्रोल लेते नजर आए हैं। इसके बाद DM कानपुर ने इस पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। पंप को भी सील कर दिया गया है। अब सभी 37 पंप की जांच के लिए SIT का गठन भी किया गया है।
आपको बता दें कि कानपुर हिंसा के दौरान करीब 50 धमाके हुए थे। अराजक भीड़ ने पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया था।
पेट्रोल लिया, अब घरों से गायब हैं
अब आपको समझाते हैं कि बोतल में पेट्रोल लेने वाले और CCTV में नजर आने वालों को संदिग्ध क्यों माना गया? दरअसल, 2 जून की CCTV की पड़ताल शुरू होने के बाद डिप्टी पड़ाव पंप पर 4 लड़के बाइक से पहुंचे। उनके हाथ में खाली बोतल थीं। उन्होंने पेट्रोल बाइक की टंकी में नहीं लिया। बोतल में भरवाने के बाद चले गए।
इन लड़कों की खोजबीन शुरू हुई। पुलिस उनकी पहचान कराकर जब घरों तक पहुंची, तो सभी गायब मिले। परिवार के मुताबिक वे लोग 3 जून के बाद घर ही नहीं लौटे। 3 जून को ही शुक्रवार की जुमे की नमाज के बाद कानपुर में हिंसा हुई थी। इस तरह से साफ हो गया कि बोतलों में लिए गए पेट्रोल का इस्तेमाल बम बनाने के लिए किया गया था।