गैसोलीन से लेकर डीजल तक हर चीज की गंभीर कमी का सामना कर रहे श्रीलंका को रूस तेल की सप्लाई की जा रही है। साइबेरियन लाइट के रशियन ग्रेड को सपुगस्कंदा में सीलोन पेट्रोलियम कॉर्प की रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाएगा। ये श्रीलंका की एकमात्र रिफाइनरी है। चेयरमैन सुमित विजेसिंघे ने एक फोन इंटरव्यू में ब्लूमबर्ग से ये बात कही।
उधर, रूसी तेल का एक बड़ा शिपमेंट भारत और चीन की तरफ बढ़ रहा है। केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक OPEC+ प्रड्यूसर का करीब 79 मिलियन बैरल ऑयल ट्रांजिट और फ्लोटिंग स्टोरेज में है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले की तुलना में ये करीब-करीब दोगुना है। उस समय ये 27 मिलियन बैरल था। डेटा और एनालिटिक्स कंपनी के अनुसार, एशिया ने पिछले महीने पहली बार यूरोप को सबसे बड़े खरीदार के रूप में पछाड़ दिया और मई में यह अंतर और ज्यादा बढ़ना तय है।
2 महीने बाद फिर शुरू होगी रिफाइनरी
श्रीलंका के बिजली और ऊर्जा मंत्री ने एक ट्वीट में कहा था, ‘देश की एकमात्र रिफाइनरी 2 महीने में पहली बार फिर से शुरू होगी और 6 दिनों में फ्यूल प्रड्यूज करेगी।’ यूक्रेन पर रुस के आक्रमण के बाद श्रीलंका रूसी कच्चा तेल लेने वाला नया एशियाई देश है। अमेरिका और पूरे यूरोप में ज्यादातर रिफाइनर ने रुस से खरीदारी रोक दी है। इससे रूसी तेल की कीमत घट गई है। कम रेट के कारण चीन और भारत ने रुस से तेल खरीदारी बढ़ा दी है।