म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले निवेशकों को जल्द टैक्स-सेविंग इन्वेस्टमेंट का एक नया विकल्प मिलेगा। बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को पैसिव इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) लॉन्च करने की अनुमति दे दी। पैसिवली-मैनेज्ड फंड में परफॉर्मेंस के आधार पर नियमित रूप से पोर्टफोलियो से कोई शेयर हटाया या नया शेयर जोड़ा नहीं जाता है।
टॉप 250 कंपनियां ही शामिल होंगी
पैसिवली-मैनेज्ड ईएलएसएस ऐसे इंडेक्स पर आधारित होंगे, जिसमें मार्केट कैप के हिसाब से टॉप 250 कंपनियां ही शामिल हों। लेकिन इसमें एक खास शर्त भी जोड़ी गई है। कोई भी फंड हाउस या तो पैसिवली-मैनेज्ड ईएलएसएस चला सकेगा या फिर एक्टिवली-मैनेज्ड ईएलएसएस की पेशकश कर सकेगा। एक ही म्यूचुअल फंड कंपनी दोनों तरह की स्कीम नहीं चला सकेगी।
नियामक ने पैसिव डेट फंड में निवेश की सीमा भी तय की
- जिस इंडेक्स का 80% एक्सपोजर डेट सिक्योरिटीज में है, उसका सिंगल एएए-रेटेड सिक्युरिटीज में 15% से ज्यादा एक्सपोजर नहीं होगा।
- एए-रेटेड सिक्युरिटीज के लिए एक्सपोजर लिमिट 12.5%, जबकि ए-रेटेड सिक्युरिटीज के लिए 10% है।
- हाइब्रिड इंडेक्स (कॉरपोरेट और सरकारी सिक्युरिटीज, दोनों) के मामले एक्सपोजर सीमा 15% तक है।
- कॉरपोरेट डेट एक्सपोजर 80% तक तो सिंगल एएए-रेटेड सिक्युरिटी की अधिकतम हिस्सेदारी 10%।
- सरकारी कंपनियों के मामले में सिंगल सिक्यु. एक्सपोजर 15% तक।