‘कांग्रेस हाईकमान के आसपास वाले लोग उन्हें बताते हैं कि फलां नेता के पार्टी छोड़ने से फर्क नहीं पड़ेगा’

‘कांग्रेस हाईकमान के आसपास वाले लोग उन्हें बताते हैं कि फलां नेता के पार्टी छोड़ने से फर्क नहीं पड़ेगा’

गुजरात विधानसभा चुनाव इस साल के आखिर में होने वाले हैं और 6 महीने पहले ही उथल-पुथल शुरू हो गई है। पाटीदार आंदोलन से निकले नेता और गुजरात के युवा चेहरे हार्दिक पटेल ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हार्दिक गुजरात कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर थे। हार्दिक ने कांग्रेस की खामियों और अपने आगे के रास्ते पर खुलकर बात की है।

हम आंदोलन के जरिए पैदा हुए लोग हैं। जनहित, समाजहित और राज्यहित के लिए हमने बहुत बड़ा आंदोलन किया। इसके बाद 2015 के पंचायत चुनाव और 2017 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मजबूत विपक्ष के रूप में खड़े होने का मौका मिला।

1985 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि कांग्रेस पार्टी को 60 सीटों से ज्यादा मिलीं। उसके बाद मुझे लगा कि हमारी शक्ति और कांग्रेस की शक्ति एक होगी तो प्रदेश में जनता की उम्मीदों पर खरा उतरकर उनके अधिकारों की लड़ाई को आराम से लड़ा जा सकता है। मेरा कोई राजनीतिक परिवार नहीं है, जनता ने हार्दिक को हार्दिक पटेल बनाया है।

मुझे लगा कि राहुल गांधी हमें समझेंगे, मदद करेंगे। इसलिए हमने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी जॉइन की थी। पार्टी जॉइन करने के बाद राज्य की लीडरशिप ने हमें परेशान किया, मॉरल डाउन किया गया, दुखी किया गया।

मैं प्रदेश के साथ पूरे देश में प्रचार करने गया और पार्टी की मजबूती के लिए लगा रहा। एक साल के बाद मुझे कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।

अगर किसी को पद दिए जाने के बाद जिम्मेदारी निभाने का मौका ही नहीं मिलेगा तो फिर वो क्या करेगा। मुझे पौने दो साल तक कार्यकारी अध्यक्ष बनाए रखा, लेकिन आज तक मेरी जिम्मेदारी तय नहीं की। मेरे जिम्मे कोई काम नहीं सौंपा गया। कार्यकारी अध्यक्ष की फोटो पोस्टर्स में तक नहीं लगाते। कोविड में जब मेरे पिता की मौत हुई तो कांग्रेस राज्य इकाई को नेता मेरे घर बैठने भी नहीं आए।

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