परसा कोल माइंस के विरोध में कांग्रेस सांसद

परसा कोल माइंस के विरोध में कांग्रेस सांसद

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित परसा कोल खदान के विरोध में अब कांग्रेस सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत भी उतर आई हैं। जंगल की जैव विविधता को नुकसान बताते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से खनन की अनुमति निरस्त करने की मांग की है। इसको लेकर कोरबा दौरे पर आए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री अश्वनी चौबे को एक ज्ञापन भी सौंपा है। कहा है कि 2010 में UPA सरकार ने भी घने जंगल क्षेत्र को नोगो एरिया घोषित किया था। अब इसकी उपेक्षा की जा रही है।

सांसद महंत की ओर से कहा गया है कि हसदेव अरण्य वन क्षेत्र देश के कुछ चुनिंदा जैव विविधता वाले क्षेत्रों में है। यह पेंच राष्ट्रीय उद्यान से शुरू होकर कान्हा, अचानकमार होता हुआ पलामू तक विस्त़ृत वन कॉरिडोर का हिस्सा है। 700 किमी लंबा कॉरिडोर कोयला खनन करने से दो हिस्सों में बंट जाएगा। परसा और केले एक्सटेंशन कोल ब्लॉक घना जंगल क्षेत्र होने के साथ-साथ गेज व चरनोई नदी का जलग्रहण क्षेत्र भी है। दोनों नदियां हसदेव नदी की सहायक हैं।

ICFRI और WII ने भी नुकसान बताया, आदिवासी भी विरोध में
ICFRI और WII की रिपोर्ट में इस क्षेत्र में कोयला खनन को अपूर्णीय क्षति बताया गया है। कोयला खनन होने से हाथी-मानव द्वंद का भी खतरा बढ़ने की आशंका है। क्षेत्र के आदिवासी भी आरेप लगा रहे हैं कि वन अनुमति प्रक्रिया में प्रस्तुत किए गए ग्राम सभा के प्रस्ताव फर्जी हैं। जबकि ग्राम सभाएं इसका विरोध कर रही हैं। इस क्षेत्र में वन अधिकारों को अंतिम निर्धारण नहीं हुआ है, इसके चलते वन भूमि डायवर्सन की स्टेज टू अनुमति नहीं दी जा सकती है।

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