पाकिस्तान की अंदरूनी सियासी कलह में बेशक प्रधानमंत्री इमरान खान अकेले पड़ गए हैं, लेकिन आम पाकिस्तानी अभी भी इमरान की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। अवाम का कहना है कि देश में बढ़ती महंगाई के चलते लोग उनके खिलाफ हो गए थे। वहीं जब से इमरान खान ने जलसों में अवाम के बीच आकर अमेरिका को ललकारना शुरू किया तब से कम से कम अवाम का झुकाव उनकी तरफ है। यहां तक कि जब वह विपक्ष में थे तब भी अमेरिका को लेकर उनके यही तेवर थे।
इन दिनों पाकिस्तान के अवाम के बीच दो ही बातों की चर्चा हो रही है। पहली यह है कि इमरान खान ने अपने शासन में दूसरे देशों में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी वोटिंग का हक दिया। लेकिन उनके खिलाफ लामबंद हुई पार्टियां इस नियम की मुखालफत (विरोध) कर रही हैं। पाकिस्तान में करीब एक करोड़ ओवरसीज वोटर हैं।
माना जाता है कि ये ओवरसीज वोटर इमरान खान के हक में वोट करने वालों में से हैं, इसलिए इमरान खान चुनाव करवाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष इस नियम को निरस्त करने की मांग कर रहा है।
पढ़ा-लिखा तबका इमरान खान के साथ- ओमर बाबर
लाहौर के पत्रकार ओमर बाबर का कहना है कि बीते 2 दिनों में इमरान खान के पक्ष में टोरंटो और रूस में बड़े कार्यक्रम हुए हैं। पाकिस्तान का पढ़ा-लिखा तबका इमरान खान के साथ है। इस तबके के लिए महंगाई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को यह तबका ठीक से समझता है।