कश्मीर-पंजाब समेत 9 राज्य हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित कर सकते हैं

कश्मीर-पंजाब समेत 9 राज्य हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित कर सकते हैं

राज्य सरकारें अपने राज्य में हिंदुओं को या किसी भी धार्मिक और भाषाई समुदायों को अल्पसंख्यक घोषित कर सकती हैं। केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील अधिवक्ता अश्वनी कुमार उपाध्याय की याचिका के जवाब में दिया है। उपाध्याय ने अपनी अर्जी में धारा-2 (एफ) की वैधता को चुनौती देते हुए देश के विभिन्न राज्यों में अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशानिर्देश तय करने के निर्देश देने की मांग की है। उनकी दलील है कि देश के 10 राज्यों में हिंदू भी अल्पसंख्यक हैं, लेकिन उन्हें अल्पसंख्यकों की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।

उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। इस पर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कोर्ट में कहा- हिंदू, यहूदी, बहाई धर्म के अनुयायी किसी भी राज्य में अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर सकते हैं और उन्हें चला सकते हैं। कानून कहता है कि राज्य सरकार उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दे सकती हैं। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सीमा में यहूदियों को अल्पसंख्यक घोषित किया है, जबकि कर्नाटक सरकार ने उर्दू, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी, तुलु, लमणी, हिंदी, कोंकणी और गुजराती भाषी समुदायों को अल्पसंख्यक घोषित किया है।

केंद्र ने कहा- याचिकाकर्ता का आरोप है कि यहूदी, बहाई और हिंदू धर्म के लोग लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में अल्पसंख्यक हैं, लेकिन अपनी पसंद से शैक्षणिक संस्थान की स्थापना और संचालन नहीं कर सकते हैं। यह गलत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *