जब से रूस ने यूक्रेन में घुसकर हमले शुरू किए, उसके खिलाफ धड़ाधड़ प्रतिबंध लगने लगे। अमेरिकी डॉलर में होने वाला उसका तेल का कारोबार घट गया। अपने तेल और गैस की बिक्री के लिए रूस को नए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। उसे भारत और चीन से उम्मीदें हैं। सबसे बड़ी बात यह कि रूस ऐसा खरीदार चाहता है जिसके साथ डील में डॉलर या यूरो की जरूरत न हो। इस बीच, फ्रांस से उसे तगड़ा झटका लगा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों ने साफ कर दिया है कि वह रूसी गैस की खरीद के लिए रूबल में पेमेंट नहीं करेंगे। Ruble रूस की मुद्रा है।
फ्रांस ने रूस से कहा NO
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूस के लिए जब वैश्विक तेल कारोबार करना मुश्किल होने लगा तो उसने तमाम देशों खासतौर से यूरोप से अपनी मुद्रा में सौदा करने की मांग की। हालांकि फ्रांस से रूस की मांग ठुकरा दी है। पश्चिमी प्रतिबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ की बैठक के बाद मैक्रों ने कहा, ‘जिस टेक्स्ट पर हस्ताक्षर किए गए हैं वो बिल्कुल स्पष्ट है। रूस की यह मांग उसके अनुरूप नहीं है।’ मैक्रों ने आगे कहा कि यूरोपीय क्षेत्र में जो यूरोपीय कंपनियां गैस खरीदती हैं उन्हें यूरो में काम करना होगा। ऐसे में आज जो मांग हो रही है उसे स्वीकार करना संभव नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि यूरोप में गैस संकट पैदा हो सकता है।