सेवाभाव सिखों के डीएनए में ही है। यही वजह कि जब भी, जहां भी कोई संकट आया, वहां पर यह कौम सहायता के लिए आगे आई। देश से लेकर विदेश तक बहुत सारे ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे, जहां पर सिखों ने संकट के समय में खुद की परवाह किए बगैर लोगों की मदद की। उनको पेट भरने के लिए खाना खिलाया।
यही जज्बा अब विदेशी धरती यूक्रेन में भी देखने को मिल रहा है। यहां पर सिख समुदाय के लोग युद्ध स्थल पर जाकर लोगों में लंगर बांट कर उनकी सेवा कर रहे हैं। यह सेवा किसी स्वार्थ से नहीं बल्कि निस्वार्थ भाव से इंसानियत को बचाने के लिए की जा रही है।
म्यांमार का संकट हो, आईएसआईएस के आतंक वाले क्षेत्र, किसान आंदोलन, दिल्ली में शाहीन बाग आंदोलन, बाढ़ग्रस्त इलाके, कोरोना महामारी का संकट सब जगह सिख समुदाय के लोगों ने आगे आकर लोगों का पेट भरा है।
अब यूक्रेन में सिख समुदाय के लोगों द्वारा लंगर तैयार करके गाड़ियों से ले जाकर जगह-जगह बांटा जा रहा है। वहीं पर ट्रेनों में भी यात्रियों को खाना खिलाया जा रहा है। बता दें कि यूक्रेन में युद्ध जैसे ही शुरू हुआ लोगों ने बैंक खातों से अपने पैसे निकलवा लिए और स्टोर्स में जाकर थोक में राशन खरीद कर अपने-अपने घरो में स्टोर कर लिया।
ताकि युद्ध के दौरान न तो वह घर से बाहर निकले और न ही घर में अंदर रहते हुए उन्हें खाने पीने की कोई समस्या आए। लेकिन लोगों की बेतहाशा राशनिंग की वजह से वहां के स्टोर खाली हो गए हैं।