7 साल के हाई पर पहुंची कच्चे तेल की कीमत

7 साल के हाई पर पहुंची कच्चे तेल की कीमत

 रूस के यूक्रेन पर हमले (Russia Attacks Ukraine) के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत (Crude Oil Price) बढ़कर सात साल के उच्चस्तर 103 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। लेकिन भारत के लिए आपूर्ति व्यवस्था पर अभी कोई असर नहीं हुआ है। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने यह कहा। अधिकारी ने भरोसा जताया कि अगर लड़ाई तेज होती है, तो भी ईंधन आपूर्ति पर असर नहीं पड़ेगा।

ग्राहकों के लिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम में तेजी का फिलहाल सीधा असर नहीं होगा। क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी दरों को मौजूदा स्तर पर कायम रखा हुआ है।

बाजार में अभी पर्याप्त आपूर्ति
अधिकारी ने कहा, ‘‘आपूर्ति व्यवस्था बनी हुई है। रूस के हमले से इस पर कोई असर नहीं हुआ है। बाजार में अभी पर्याप्त आपूर्ति है। हमारे आपूर्तिकर्ता पश्चिम एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में हैं। उन पर इस हमले का कोई असर नहीं हैं और वे पहले की तरह तेल और गैस की आपूर्ति करते रहेंगे। अगर यूक्रेन संकट गहराता भी है, तो भी स्थिति जस-की-तस बनी रहने की उम्मीद है।’’ अधिकारी ने नाम देने से मना किया।

अगस्त 2014 के बाद का उच्च स्तर
हालांकि, मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले असर को देखते हुए कीमतों में तेजी जरूर चिंता का विषय है। उसने कहा, ‘‘खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। लेकिन अंतत: इसे बढ़ाना ही पड़ेगा।’’ ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 103.78 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई। यह 14 अगस्त, 2014 के बाद सर्वाधिक है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी 85 प्रतिशत जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। आयातित कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (रसोई गैस) में बदला जाता है।

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