सिर्फ 3 मिनट रह गया अटेंशन टाइम:मोबाइल फोन, प्रोसेस्ड फूड और कम नींद से फोकस टूट रहा

सिर्फ 3 मिनट रह गया अटेंशन टाइम:मोबाइल फोन, प्रोसेस्ड फूड और कम नींद से फोकस टूट रहा

ब्रिटेन के मशहूर लेखक योहान हारी का कहना है कि आजकल लोगों में एकाग्रता टूट रही रही है। किसी भी काम के प्रति लोगों में अटेंशन टाइम में काफी कमी दर्ज की गई है। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी के कारण दिमाग पर बुरा असर पड़ रहा है। अमेरिका में किसी भी औसत कर्मचारी को यदि कोई टास्क दिया जाता है, तो वो 3 मिनट से ज्यादा उस पर एकाग्र नहीं रह पाता है। जबकि हम हर दिन लगभग दो हजार बार अपने मोबाइल फोन को चेक करते हैं।

हाईटेक कंपनियां हमारे अटेंशन से मोटी कमाई करती हैं

औसतन लगभग तीन घंटे से ज्यादा समय तक हम अपने मोबाइल फोन को निहारने में गुजारते हैं। हारी इसे अटेंशन क्राइसिस कहते हैं। बड़ी हाईटेक कंपनियों का बिजनेस मॉडल इस प्रकार का है कि वो अटेंशन से ही मोटी कमाई करती हैं। लोगों में फोकस में आने वाली कमी के सबसे अहम कारण जिन पर बहुत कम चर्चा की जाती है, वो है हाई प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेटेड फूड और कम नींद लेना। इससे भी हमारे फोकस पर बुरा असर पड़ रहा है।

एकाग्रता पाने के लिए हारी अपना खुद का उदाहरण देते हैं कि उन्होंने तीन माह तक इंटरनेट से ब्रेक लिया और 8 घंटे की भरपूर नींद ली। इसके साथ ही उनका मानना है कि लोगों में रीडिंग की प्रवृत्ति भी बहुत कम हो रही है। मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन पर रीडिंग से एकाग्रता में बढ़त नहीं होती है, जबकि किताब पढ़ने के कारण एकाग्रता जरूर बढ़ जाती है। ऐसा करना दिमाग के लिए भी बेहतर साबित होता है।

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