बप्पी दा थोड़ा जल्दी चले गए। अगर उनका स्वास्थ्य नहीं बिगड़ता, तब उनमें ऐसी एनर्जी थी कि 10 साल तक म्यूजिक में घमासान मचाकर रख देते, क्योंकि उनमें ऐसा बहुत बड़ा करिश्मा था। वे चुपचाप देखते रहते थे कि समय कैसे बदल रहा है ऑडियंस चाहती है और म्यूजिक कैसे बदल रहा है। यह बदलाव उन्होंने उस समय लाया, जिस समय बड़े-बड़े भीमकाय कंपोजर खड़े हुए थे। जैसे कि आरडी बर्मन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, कल्याणजी-आनंदजी भाई, नौशाद… सब अपने-अपने तरीके का बेहतरीन म्यूजिक दे रहे थे। लेकिन अचानक एक नौजवान आता है और संगीत की परिभाषा बदल देता है। उन्होंने यह जो चैलेंज किया और अपने को एक्सेप्ट करवाया। फिर एक टाइम ऐसा आया कि बप्पी दा के अलावा कोई म्यूजिक इंडस्ट्री में और का नाम ही नहीं ले रहा था।
साउथ वाले भी इस तरफ आ रहे थे और अमिताभ बच्चन की फिल्में चाहे वह नमक हलाल हो, शराबी हो… बहुत सारी फिल्मों में सुपर-डुपर हिट म्यूजिक देते चले गए। इसके बाद मिथुन चक्रवर्ती के साथ डिस्को डांसर… देकर जो शुरुआत किया, उसके बाद उन्होंने खुद ही अपना एक जोनर बना लिया और डिस्को किंग बन गए। रॉक म्यूजिक को डिफरेंट-डिफरेंट तरीके से इंट्रोड्यूज किया। मजे की बात यह है कि आज भी जवान से लेकर बूढ़ा व्यक्ति बप्पी दा के गानों को गाता है।
मेरी बेटी की शादी में आए थे दादा
मेरा पर्सनल एक्सप्रीरियंस है कि हमारी बेटी इशिता की शादी में बप्पी दा सपरिवार आए थे। बप्पी दा आए, तब मेरी हिम्मत नहीं हुई कि उनसे यह कहूं कि दादा आप भी गाना। लेकिन दादा ने कहा कि इला ने मेरे दोनों बच्चे की शादी में गाया। मैंने कहा कि यह तो मेरा फर्ज था। लेकिन दादा जब स्टेज पर उतरे, तब एक घंटे तक गाते हुए जमे रहे। नाजारा यह था कि यंगर लोग उन्हें स्टेज से उतरने नहीं दे रहे थे। मजे की बात यह भी थी कि जब गा रहे थे, तब उनका अपना म्यूजिक बैंड नहीं, बल्कि हमारा म्यूजिक बैंड था। चूंकि दादा के गाने इतने पॉपुलर हैं कि वे कहीं भी खड़े होकर गा सकते थे।