ब्रिटेन में यूक्रेन के राजदूत ने रूस के साथ जंग के खतरे के बीच ऐलान किया है कि उनका देश उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) में शामिल होने के विचार को छोड़ सकता है। दरअसल, रूस की नाटो और यूक्रेन से प्रमुख मांग है कि कीव नाटो में शामिल होने के विचार को छोड़ दे। सीमा पर रूस के 1 लाख से ज्यादा सैनिकों की तैनाती देख यूक्रेन घबराया हुआ है। यूक्रेन के राजदूत ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से बात की है।
यूक्रेन राष्ट्रपति ने बाइडन से अपील की कि वह कीव का दौरा करें ताकि रूस को संदेश दिया जा सके। ब्रिटेन में यूक्रेन के राजदूत वदयम प्रयस्तैको ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि यूक्रेन नाटो में शामिल होने को लेकर बहुत ‘लचीला’ है। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होता है तो दुनिया में परमाणु युद्ध शुरू हो सकता है। नाटो की सदस्यता की स्थिति पर क्या यूक्रेन अपने रुख में बदलाव कर सकता है, इस पर राजदूत ने कहा, ‘हमें खासतौर पर इस तरह से धमकाया जा सकता है, ब्लैकमेल किया जा सकता है और ऐसा करने के लिए दबाव डाला सकता है।’
रूस को लक्ष्मण रेखा खींचने की जरूरत: पुतिन
यूक्रेन अभी नाटो का सदस्य देश नहीं है लेकिन साल 2008 से वादा किया जा रहा है कि यूक्रेन को नाटो में शामिल किया जाएगा। यूक्रेन अगर नाटो में शामिल होता है तो अमेरिकी सैन्य गठबंधन रूस की सीमा तक पहुंच जाएगा। इसी खतरे को देखते हुए पुतिन ने आक्रामक रुख अपना लिया है। पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन का नाटो देशों के साथ बढ़ता गठबंधन उसे नाटो की मिसाइलों के रूस पर हमले के लिए लॉन्चपैड के रूप में तब्दील कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस हमले को रोकने के लिए रूस को लक्ष्मण रेखा खींचने की जरूरत है।