अमेरिका में अजनबियों को किस्से सुनाकर तनाव, अकेलापन दूर हो रहा

अमेरिका में अजनबियों को किस्से सुनाकर तनाव, अकेलापन दूर हो रहा

बीते दिसंबर में जैसे ही कोरोना के मामले बढ़े और यात्रा प्रतिबंध कड़े हुए, डेबोरा गोल्डस्टीन और उनकी 85 वर्षीय मां ने टीवी पर आ रही कोराना की निराशा भर देने वाली खबरों और राजनीतिक बयानबाजियों से दूर स्कॉटलैंड के जंगल की यात्रा करना बेहतर समझा। वहां वे दोनों एक पशु प्रेमी किशोरी, उसकी बेरहम सोतैली मां और 12 जादुई काल्पनिक बौनों से मिले। हैरानी की बात यह है कि इस सफर का मजा उन्होंने मैनहट्‌टन स्थित फ्लैट से लिया।

दरअसल डेबोरा ऑनलाइन स्टोरीटेलिंग सर्किल (कहानियां सुनाने वाले समूह) से जुड़ी हैं। इसमें हर दूसरे गुरुवार समूह में दर्जनों लोग ऑनलाइन किस्से-कहानियां साझा करते हैं। महामारी ने तनाव और अकेलापन बढ़ा दिया है। इसलिए न्यूयॉर्क सोसायटी फॉर एथिकल कल्चर ने यह पहल की। विशेषज्ञों का मानना है कि कहानियां सुनने-सुनाने और बातें साझा करने से मानसिक सेहत सुधरती है। चिंता व अकेलापन घटाने में भी यह कारगर है। ‘एथिकल कल्चर’ ग्रुप से जुड़ीं डेबोरा बताती हैं, ‘कहानियों से मेरी एंग्जाइटी घट रही है।’

डेनवर स्थित स्टोरी सेंटर के प्रमुख डेनियल वीनशेंकर कहते हैं, हम सभी जूम के जरिए जुड़ते हैं। कैमरा वैकल्पिक है। एक सर्कल में 5 से 25 लोग होते हैं। आमतौर पर ये लोग काल्पनिक कहानियां और कभी-कभी असली अनुभव साझा करते हैं। खासकर जो बदलाव से जुड़े होते हैं। इससे लोगों को जीवन में हो रहे अप्रत्याशित बदलावों से निपटने में मदद मिल सकती है। जैसे हाल में एक नर्स ने उड़ने में अक्षम चिड़िया की कहानी सुनाई, जिसे उसने घर की खिड़की के बाहर से बचाया था।

इसके माध्यम से उसने बताया कि वह मांओं और नवजातों की भी ऐसे ही देखभाल करती थी। पर महामारी ने सब बदल दिया। वीनशेंकर बताते हैं, ‘कोरोना ने लोगों को गहरा दुख और अनिश्चितता ही दी है। हमारी कोशिश यह रहती है कि इन मुद्दों के बजाय प्रतिभागी बचपन की कोई बात या फिर दादी-नानी से जुड़ा किस्सा साझा करे। या फिर काल्पनिक पात्र के जरिए बताए कि जिंदगी में क्या उथल-पुथल है, जिससे उसे बाहर लाने की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *