कोरोना वायरस से होने वाली समस्याएं इलाज के बाद भी लोगों को परेशान कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो डेल्टा की तरह कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से भी लॉन्ग कोविड होने की संभावना हो सकती है। हालांकि इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। लॉन्ग कोविड के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। इसलिए हमारा पूरा फोकस संक्रमण को रोकने पर होना चाहिए।
क्या है लॉन्ग कोविड?
लॉन्ग कोविड के साथ जी रहे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में काम करने में कठिनाई हो सकती है। इसकी जांच आमतौर पर कोरोना से संक्रमित होने के कई हफ्तों बाद की जाती है। WHO की वैज्ञानिक मारिया वान केरखोव के अनुसार, कोरोना के लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स प्रारंभिक संक्रमण के 90 दिनों बाद दिखाई देने लगते हैं। इसके बाद ये लक्षण कुछ हफ्तों, महीनों या सालों बाद भी मरीज में बने रह सकते हैं।
केरखोव कहती हैं कि लॉन्ग कोविड के लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कोरोना वायरस के ये साइड इफेक्ट्स अलग-अलग या हर अंग को प्रभावित कर सकते हैं। जहां कुछ लोगों को इनके कारण एक्सरसाइज करने में तकलीफ होती है, वहीं कुछ में ये दिल की बीमारी को जन्म दे सकते हैं।