पंजाब में 2017 के मुकाबले अकाली मजबूत

पंजाब में 2017 के मुकाबले अकाली मजबूत

बसंत पंचमी गुजर चुकी है। पंजाब में धूप निकलने के बावजूद ठंडी हवाओं के बीच सुबह-शाम धुंध छा रही है। कुछ ऐसा ही कुहासा पंजाब की राजनीति में भी छाया है। एकबारगी लगता है कि विधानसभा चुनाव में वोटिंग से डेढ़ हफ्ते पहले तक कुछ भी स्पष्ट नहीं है मगर इस भ्रम के पार जाकर यदि देखने की कोशिश करें तो कई चीजें एकदम साफ नजर आती हैं। मसलन 5 साल सत्ता में रही कांग्रेस कड़े मुकाबले में फंसी है।

अकाली दल अपने कैडर के बूते परफार्मेंस सुधारने की जुगत में है। वहीं, BJP नए साथियों के साथ सीटें और वोट प्रतिशत बढ़ाने की फिराक में हैं। इन सबके बीच 5 साल पहले मालवा में अच्छा प्रदर्शन करने वाली आम आदमी पार्टी माझा और दोआबा में एंट्री लेती दिख रही है।

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी BJP इस बार बॉर्डर स्टेट पंजाब में सत्ता की दौड़ में शामिल हैं। अकालियों के अलग होने के बाद BJP नए क्षत्रपों के साथ मुकाबला चार कोणीय बना रही है। वहीं, 3-4 सीटों पर किसान संगठनों का संयुक्त समाज मोर्चा इस टक्कर को पांच-कोणीय भी बनाता दिख रहा है। पंजाब की राजनीति पर नजर रखने वाले सियासी पंडित कहते हैं कि प्रदेश में इस तरह के वोट डिवीजन वाला चुनाव पहले कभी नहीं हुआ। शायद यही वजह है कि भले ही यूपी समेत देश के 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हों मगर चर्चा के केंद्र में पंजाब है। इन सबके बीच भी अगर कुछ गायब हैं तो वो है पंजाब और पंजाबियों के मुद्दे।

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