क्या कुछ वक्त से आपको भी तारीख, नंबर और रोजमर्रा के काम याद रखने में परेशानी हो रही है? अगर आपका जवाब हां है तो आप अकेले नहीं है। पिछले दो सालों में कोरोना महामारी ने हम सभी की याददाश्त को कमजोर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके कारण लोगों में फोकस न कर पाने और जरूरी जानकारी भूलने की समस्या बढ़ती जा रही है।
महामारी में हमें कुछ याद न रखने की आदत हो गई
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ केंट में साइकोलॉजी के सीनियर लेक्चरर आमिर हुमायूं जवादी ने CNN से बात करते हुए बताया कि इंसानों को परिस्थितियों में ढलने की आदत होती है। चूंकि पिछले दो साल से लोगों ने जीवन में ज्यादा कुछ प्लान नहीं किया, उन्हें अब ये चीजें न करने की आदत हो गई है। लोग इस तरह का जीवन जीना सीख गए हैं। इससे उनकी याददाश्त और ध्यान लगाने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ा है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में न्यूरोबायोलॉजी प्रोफेसर माइकल यास्सा के अनुसार, मेमोरी का मतलब केवल एक फोटो खींचकर उसे याद कर लेना नहीं है। मेमोरी एक पल को जीने से बनती है। कोरोना महामारी के दौरान लोगों के लिए मेमोरी बनाना बहुत कठिन हो गया है। उनके जीवन में ऐसा कुछ खास होता ही नहीं जिसे याद रखा जा सके। इसलिए उन्हें कुछ याद न रखने की आदत हो गई है।