देश के सबसे बड़े राज्य UP में चुनाव चल रहे हैं, लेकिन मायावती चुप हैं। चुनाव से महज आठ दिन पहले बुधवार को उन्होंने अपनी पहली रैली आगरा में की। ये वही मायावती हैं, जो चार बार UP की CM रह चुकी हैं। तीन दशकों से भी ज्यादा समय से UP की राजनीति में बड़ा चेहरा रही हैं और खुद को दलितों-पिछड़ों का सबसे बड़ा नेता मानती हैं।
अब हालात ये हैं कि बीते 15 सालों से कोई भी बड़ा चुनाव नहीं जीत सकी हैं। आखिर बहनजी चुप क्यों हैं? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमने उन अधिकारियों से बात की जो एक दौर में मायावती के सबसे करीबी रहे हैं। उन्होंने हमें नाम न छापने के अनुरोध पर मायावती के चुप रहने की दो वजहें बताईं।
पहली वजह है, आय से अधिक संपत्ति। करीबियों की मानें तो मायावती और उनके परिवार पर जो आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है, उसने उन्हें केंद्र के शिकंजे में कस दिया है, जिस वजह से वो खुलकर भाजपा को घेर नहीं पा रहीं।
दूसरी वजह है, उनका स्वास्थ्य। मायावती अब 66 साल की हो चुकी हैं। कोरोना के चलते भी उन्हें अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
सिर्फ ये दो बातें ही नहीं हैं जो बताती हैं कि मायावती चुप हैं, बल्कि कई ऐसे घटनाक्रम भी हैं, जो यह साबित करते हैं कि, मायावती BJP के खिलाफ खुलकर बोल नहीं रहीं। हम 4 ऐसी घटनाएं आपके साथ साझा कर रहे हैं, जो यह साबित करती हैं कि बहनजी बोलने की सिर्फ औपचारिकता निभाती लग रही हैं। इस खबर को पढ़ने से पहले पोल में भी अपनी राय दीजिए।