इन 5 घरेलू उपायों से साइनस का होगा अब जड़ से इलाज

इन 5 घरेलू उपायों से साइनस का होगा अब जड़ से इलाज

ऐसी एक धारणा है कि साइनोसाइटिस की समस्या केवल साधारण जुकाम ही है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दरअसल साइनस हमारे माथे और नाक की हड्डी के पीछे की तरफ, हवा से भरी एक जगह होती है। यह हमारे मस्तिष्क को न केवल हल्का करती है, बल्कि आवाज को भी बेहतर करती है। इसके अलावा साइनस का मुख्य कार्य नाक को मॉइस्चराइज करने का होता है और यह शरीर में कीटाणु और सूक्ष्मजीवों के प्रवेश को रोकती है।

लेकिन जब साइनस का रास्ता रूक जाता है और उपचार के तीन महीने बाद तक भी स्थिति नहीं बदलती, तो यह साइनोसाइटिस की समस्या बन जाती है। जिसकी वजह से न केवल नाक से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बल्कि इसकी वजह से या तो नाक हर समय बहती रहती है या फिर नाक भरी रहती है। यही नहीं साइनोसाइटिस की स्थिति गले की दिक्कत भी पैदा कर सकता है और आंख के आस पास भी सूजन आ सकती है।

योग और भारतीय आयुर्वेद के प्राचीन चिकित्सकों ने एक ऐसी तकनीक को इजाद किया है जो साइनस के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको बता दें कि हठयोग प्रदीपिका में जल नीति छह शुद्धिकरण तकनीकों में से एक है, जिसे षट्कर्म कहा जाता है। ज्ञात हो कि यह वाटर क्लीनिंग का एक संस्कृत शब्द है।

आप शायद न जानते हों इसलिए बता दें कि नैसेल कंजेशन और इरिटेशन से राहत पाने के लिए इरिगेशन एक बेहतरीन टेक्निक है। इस टेक्निक में सैलाइन सॉल्यूशन के जरिए नेजल पैसेज को साफ किया जाता है। आप यह किसी बोतल या नीति पोट के जरिए कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे इसके उपयोग से पहले और बाद में इन्हें साफ जरूर करे। इसके अलावा उबला हुआ पानी ठंडा होने के बाद ही इस्तेमाल में ले और बिना स्टरलाइज किए नल के पानी का उपयोग न करें। इस टेक्निक के लिए बाजार से सेलाइन वाटर खरीद सकते हैं, या फिर घर पर भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक चम्मच सी सॉल्ट और फिल्टर पानी एवं एक चुटकी बेकिंग सोडा की जरूरत होगी। इसे घोल कर मिला लें। इसके बाद इस्तेमाल में लें।

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