पंजाब के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी बेशक प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिद्धू, CM चरणजीत सिंह चन्नी और कैंपेन कमेटी के चीफ सुनील जाखड़ की सामूहिक अगुवाई में उतरने का दावा कर रही हो, लेकिन ड्राइविंग सीट पर सिद्धू ही हैं। कैंडिडेट्स से लेकर पंजाब के बारे में कांग्रेस का विजन रखने का जिम्मा सिद्धू ने ही संभाल रखा है। क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू का सियासत करने का अलग अंदाज हैं।
सिद्धू का ये स्टाइल कई बार उन्हीं के पार्टी नेताओं को असहज कर देता है, लेकिन सिद्धू इस सबसे बेफिक्र अपनी ‘बैटिंग’ कर रहे हैं। इधर, पंजाब में मतदान में महीनेभर से भी कम समय बचा है और चुनावी सरगर्मियां जोर पकड़ रही हैं।
आप हमेशा दूल्हे की बात करते रहे हैं। आम आदमी पार्टी CM चेहरे के रूप में भगवंत मान का नाम अनाउंस कर चुकी है। अब पंजाब जानना चाहता है कि कांग्रेस का दूल्हा कौन होगा?
देखिए, अभी एक महीना पड़ा है। पिछली बार भी CM का नाम मतदान से 10-12 दिन पहले ही अनाउंस हुआ था। बाकी हाईकमान की हाईकमान जाने, वह हम मीडिया के जरिए नहीं बताएंगे। हां, इतना जरूर है कि पंजाब के लोगों को क्लेरिटी होनी चाहिए कि पंजाब मॉडल को कौन लागू करेगा? और किस तरह से हम इस मॉडल के जरिये लोगों की जिंदगी बेहतर बनाएंगे।
लोग कई दिन से पंजाब मॉडल देख रहे हैं। पंजाब जानना चाहता है कि यह ‘पंजाब मॉडल’ कांग्रेस पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र है या सिद्धू का विजन है? अगर कांग्रेस सरकार बनाती है तो इसे लागू कौन करेगा?
पंजाब कांग्रेस का प्रधान होने का मतलब है कि यह कांग्रेस का ही विजन है। मैं कोई इंडिविजुअल नहीं हूं। उत्तरदायित्व, योग्यता और ताकत साथ-साथ चलती है। योग्यता मुझ में थी और हाईकमान ने ताकत दी कि हम पंजाब के लिए एक रोडमैप लेकर आएं, जिससे बेहाल पंजाब खुशहाली के रास्ते पर लौट सके। इसलिए मैं इसे पंजाब के लोगों का मॉडल कहता हूं। पंजाब किसी एक की प्रॉपर्टी नहीं है।