झारखंड के पानी में तेजी से जहर घुल रहा है। जानलेवा आर्सेनिक-फ्लोराइड का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। साहिबगंज में गंगा किनारे के 58 गांवों में इसके कारण कैंसर फैल रहा है। इससे 500 परिवार वाले एक ही गांव में लगभग 30 से अधिक मौतें अब तक हो चुकी है। इसका कारण है राज्य में तेजी हो रहा अवैध खनन और उद्योगों से फैलने वाला प्रदूषण।
इसकी सच्चाई की पड़ताल करने दैनिक भास्कर के रिपोर्टर पंकज त्रिपाठी और फोटो जर्नलिस्ट संदीप नाग की टीम संताल के जिले साहिबगंज के डिहरी गांव पहुंची। यहां पिछले पांच साल में कैंसर से 30 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। भारतीय सेना से रिटायर होकर गांव में रहने आए गंगा सागर यादव ने बताया, ‘मैं गांव का अकेला खुशनसीब हूं कि पत्नी 13 साल से कैंसर से पीड़ित हैं, पर अभी तक ठीक हैं।’
उन्होंने बताया, ‘गांव के हर घर में लोग बीमार हैं। किसी को कैंसर तो किसी को गंभीर चर्म रोग है। इसका कारण है पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन की बेहिसाब मात्रा। गंगा किनारे बसे 78 गांवों में से 58 में इसका प्रकोप देखा जा सकता है। आर्सेनिक के लगातार संपर्क में आने से यहां के लोगों को त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियां हो रही हैं।’