प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 60+ उम्र वाले ऐसे बुजुर्गों को 10 जनवरी से वैक्सीन का ‘प्रिकॉशनरी डोज’ देने की घोषणा की, जो कोमॉर्बिडिटीज के दायरे में आते हैं। साथ ही, 10 जनवरी से हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी कोरोना के खिलाफ प्रिकॉशनरी डोज दिया जाएगा। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक बार भी ‘बूस्टर डोज’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। एक्स्पर्ट्स की मानें, तो इन दोनों शब्दों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं।
प्रिकॉशनरी डोज और बूस्टर शॉट में क्या है अंतर
सरल भाषा में प्रिकॉशनरी डोज का मतलब एक ही वैक्सीन का तीसरा या एडीशनल डोज है। डॉक्टर्स इसे ऐसे मरीजों को देंगे, जिनका शरीर गंभीर बीमारियां होने के कारण काफी कमजोर है। उदाहरण- HIV और कैंसर से पीड़ित मरीज। इस डोज को प्रिकॉशनरी इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि यह ऐसे लोगों को लगाया जाएगा, जिनके अंदर वैक्सीन के दो डोज के बाद भी इम्यूनिटी ना के बराबर बढ़ती है।
इसके अलावा, प्रिकॉशनरी डोज हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को इसलिए लगाया जाएगा, क्योंकि भारत में फाइजर और मॉर्डना के बूस्टर शॉट्स उपलब्ध नहीं हैं।