भारतीय भोजन में सरसों के तेल का उपयोग बहुत ज्यादा किया जाता है। इससे खाने का स्वाद दोगुना बढ़ जाता है। खासतौर से बंगाली लोग भोजन को अक्सर ही सरसों के तेल में पकाते हैं। लेकिन इसकी तेज गंध, पीला गहरा रंग और तीखा स्वाद कुछ लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं होता, लेकिन स्वास्थ्य के लिए सरसों का तेल बहुत फायदेमंद माना गया है। इससे मासंपेशियों के दर्द व सूजन कम करने, माइक्रोबियल ग्रोथ को रोकने के साथ दिल के स्वास्थ्य और सर्दी का इलाज करने में मदद मिलती है। यही वजह है कि सर्दियों में लोग अन्य तेल के मुकाबले सरसों के तेल का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं।
इसके उलट कुछ लोगों की इसकी तेज गंध और तीखा स्वाद पसंद नहीं होता। इससे बचने के लिए वे खाना पकाने से पहले इसे अच्छी तरह से जला लेते हैं। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा करने में समझदारी है। अगर आप भी ऐसा करने वालों में से हैं, तो यहां आपको ध्यान देने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही तेल का धुंआ स्मोकिंग पॉइंट (तेल जलने पर कितनी जल्दी धुंआ छोड़ना शुरू करता है) पर पहुंचता है, तो तेल विषाक्त पदार्थ पैदा करना शुरू कर देता है, जिससे स्वास्थ्य को होने वाले फायदे लगभग खत्म हो जाते हैं। तो आइए जानते हैं खाना पकाने के लिए सरसों का तेल जलाने के क्या प्रभाव होते हैं।