10 और 11 नवंबर को दिल्ली में 7 देशों के NSAs’ की मीटिंग होगी। ये मीटिंग अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत ने बुलाई है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस मीटिंग में आने से मना कर दिया है। तीन महीने पहले अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान काबिज हुआ। सत्ता बदलने के बाद भारत कूटनीतिक तौर पर अफगानिस्तान में कमजोर हुआ है। ऐसे में ये मीटिंग काफी अहम मानी जा रही है।
भारत ये बैठक क्यों कर रहा है?
अफगानिस्तान में बदले हालात के बाद अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के चलते भारत ने इस मीटिंग की पहल की है। इस मीटिंग में सभी क्षेत्रीय स्टेक होल्डर्स और अहम शक्तियों को आमंत्रित किया गया है। इस मीटिंग में अफगानिस्तान के मौजूदा हालात और भविष्य को लेकर चर्चा होगी।
भारत की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेट्रिएट इस इन-पर्सन मीटिंग का आयोजन कर रही है। इस मीटिंग में शामिल होने का निमंत्रण अफगानिस्तान के सभी पड़ोसी देशों को भेजा गया है। इनमें पाकिस्तान, ईरान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ ही रूस और चीन भी शामिल हैं।
तो क्या पाकिस्तान इस कॉन्फ्रेंस में शामिल हो रहा है?
नहीं, ऐसा नहीं हो रहा है। पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर मोईद यूसुफ ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि वो इस मीटिंग में शामिल नहीं होंगे। पाकिस्तान का दावा है कि अफगानिस्तान में भारत ने नकरात्मक भूमिका निभाई है। इसका विरोध करते हुए वो इस मीटिंग में नहीं शामिल होंगे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूसुफ ने कहा था कि मैं नहीं जा रहा है, क्योंकि चीजें बिगाड़ने वाला कभी शांतिदूत नहीं बन सकता है। इस क्षेत्र की समस्याएं सब के सामने हैं। इन पर बात करने की कोई जरूरत नहीं है। यूसुफ ने कहा कि अगर अफगानिस्तान में शांति स्थापित होती है तो वो एक बड़ा बाजार बन सकता है।