अफगानिस्‍तान पर पाकिस्‍तान-चीन की चाल को नाकाम करेगा भारत

अफगानिस्‍तान पर पाकिस्‍तान-चीन की चाल को नाकाम करेगा भारत

काबुल
अफगानिस्‍तान में तालिबान राज आने के बाद पाकिस्‍तान और चीनी ड्रैगन ने भारत को अलग-थलग करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। भारत के दोनों ही दुश्‍मनों को शुरुआत में थोड़ी बढ़त मिली लेकिन अब भारत ने पलटवार की पूरी तैयारी कर ली है। विशेषज्ञों के मुताबिक अफगानिस्‍तान मसले पर भारत अब रूस के सहारे आगे बढ़ने जा रहा है जो नई दिल्‍ली का पुराना घनिष्‍ठ मित्र है। भारत अफगानिस्‍तान पर एक क्षेत्रीय सम्‍मेलन करने जा रहा है। इस बैठक में ताजिकिस्‍तान, उज्बेकिस्‍तान, रूस के हिस्‍सा लेने की उम्‍मीद है, वहीं पाकिस्‍तान के एनएसए ने भारत यात्रा से इनकार कर दिया है।

रूस में भारत के राजदूत बाला वेंकटेश वर्मा को उम्‍मीद है कि इस बैठक में रूसी सुरक्षा परिषद काउंसिल के प्रमुख निकोलई पत्रूशेव हिस्‍सा लेंगे। रूस, ताजिकिस्‍तान और उज्‍बेकिस्‍तान का भारत के आमंत्रण को स्‍वीकार करना, चारों के बीच अच्‍छे रिश्‍तों का संकेत है। अमेरिका के साथ गहरी दोस्‍ती के कारण भारत तालिबान राज में अलग-थलग पड़ता जा रहा था। रूस अब भारत की मदद करने के लिए आगे आया है। भारत रूस के हथियारों का बड़ा खरीदार है और पुतिन अगले महीने भारत आ रहे हैं।

रूस जहां अपने सबसे घातक हथियारों को दे रहा है, वहीं अमेरिका अभी इसे परहेज कर रहा है। रूस ने मध्‍य एशिया में अमेरिकी सेनाओं की किसी भी तरह से उपस्थिति को सफलतापूर्वक रोक दिया है। यह रूस का एक सख्‍त रूख है। वहीं विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यदि तालिबान की सरकार गिरती है या देश में गृहयुद्ध की आंच में फिर से सुलगता है तो इस इलाके में रूस एक गंभीर खिलाड़ी हो सकता है। इसलिए भारत रूस के साथ- साथ अन्‍य मध्‍य एशियाई देशों के साथ संपर्क में बना हुआ है।

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