आईपीएल जब शुरू हुआ था, तब यह माना जा रहा था कि नामी खिलाड़ियों को लेकर यह टूर्नामेंट जीता जा सकता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह धारणा बदलने लगी है। फ्रेंचाइजी अब ऐसे अनजाने खिलाड़ियों को तरजीह देने लगी है जो टैलेंटेड हो और एकजुट होकर ऐसी टीम बना सके जो टूर्नामेंट जीतकर करोड़ों दर्शकों का मन जीत ले।
इसके लिए अब सभी फ्रेंचाइजी सालभर टैलेंट ढूंढ़ने में व्यस्त रहती हैं। अनजाने टैलेंट को मौका देने की शुरुआत मुंबई इंडियंस ने की। इस टीम की बागडोर आकाश अंबानी के पास है। आकाश अपनी टीम में टैलेंट की देख-रेख पर सबसे अधिक समय खर्च करते हैं। टैलेंट ढूंढ़ने के लिए मुंबई इंडियंस की प्रतिबद्धता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय टीम के पूर्व कोच जॉन राइट टैलेंट की खोज के डायरेक्टर हैं।
बुमराह भी आईपीएल से सामने आए
वहीं, भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर और चीफ सिलेक्टर किरण मोरे तेज गेंदबाज टीए सीकर, अभय कुरुविला और सलामी बल्लेबाज प्रवीण आमरे के साथ मिलकर मुंबई इंडियंस की एकेडमी संभालते हैं। ये सारे दिग्गज पूरे साल भारत के घरेलू क्रिकेट पर ही नहीं, दुनियाभर के उभरते खिलाड़ियों पर नजर रखते हैं। ये जॉन राइट ही हैं, जिन्होंने जसप्रीत बुमराह को रणजी ट्रॉफी खेलते देखा और उनकी काबिलियत के आधार पर उन्हें मुंबई इंडियंस की ओर से आईपीएल खेलने का मौका दिया। अपने आईपीएल के प्रदर्शन के दम पर ही बुमराह भारतीय टीम में आए और आज उनका नाम दुनिया के श्रेष्ठ गेंदबाजों में लिया जाता है।