बिहार में अपना जनाधार खो चुकी कांग्रेस के पास राज्य में कोई बड़ा चेहरा नहीं है। ऐसे में क्या वह कन्हैया कुमार में भविष्य का नेता देख रही है? क्या लेफ्ट से सेंटर आने के बाद कन्हैया वह सब कर सकेंगे, जो वो करना चाहते हैं। दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्रसंघ का नेतृत्व कर सुर्खियों में आए कन्हैया से कांग्रेस को क्या उम्मीदें हैं?
कन्हैया कांग्रेस में क्यों जा रहे हैं?
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन कहते हैं कि CPI में किसी के लिए कोई बड़ी संभावना नहीं बची है। ऐसे में कोई युवा नेता अगर राजनीति में करियर बनाना चाहता है तो उसे परेशानी होगी। इसलिए कन्हैया भी अपने लिए नए विकल्प तलाश रहे थे। वो कहते हैं कि CPI भी कन्हैया को बढ़ाने में रुचि नहीं ले रही थी। पिछले चुनाव में जब गठबंधन बढ़िया बन गया था, लेकिन उनकी पार्टी ने उन्हें प्रमोट नहीं किया। चुनाव के दौरान कन्हैया ने जो टूर शुरू किया था उसे भी पार्टी लीडरशिप ने रुकवा दिया था।
दरअसल, उनके सामने कोई रास्ता ही नहीं था। उनकी अपनी पार्टी CPI फरवरी में उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर चुकी है। पार्टी के पटना ऑफिस में कन्हैया ने 1 दिसंबर 2020 को कार्यालय सचिव इंदुभूषण वर्मा के साथ मारपीट की थी। उस समय हैदराबाद में CPI नेशनल काउंसिल की बैठक चल रही थी।