माटेगहन में ‘आजीविका डबरी’ बनी समृद्धि की संवाहक

माटेगहन में ‘आजीविका डबरी’ बनी समृद्धि की संवाहक

 

जल संरक्षण के साथ खुले कृषि और मत्स्य पालन के नए द्वार

​रायपुर, 29 सितंबर 2026/

ग्रामीण विकास का असली उद्देश्य केवल भौतिक परिसंपत्तियों का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण परिवारों की स्थायी आजीविका, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का जरिया बनाना है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत इस सोच को धरातल पर साकार किया है धमतरी विकासखण्ड की ग्राम पंचायत चिखली के आश्रित गांव माटेगहन ने। यहाँ वीबीजीरामजी योजना के तहत निर्मित एक ‘आजीविका डबरी’ ने किसान ईश्वर/नम्मु के जीवन में खुशहाली और आर्थिक मजबूती का नया अध्याय लिख दिया है।
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2.43 लाख रुपए की स्वीकृति से आकार लिया नया जीवन

​माटेगहन का यह अंचल मुख्य रूप से वर्षा-आधारित कृषि पर निर्भर रहा है, जहाँ समय पर सिंचाई का जल न मिलना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए योजना के तहत 2,43,760 रुपये की स्वीकृति दी गई। पारदर्शी प्रक्रिया के साथ 2,10,073 रुपये की लागत में इस आजीविका डबरी का निर्माण पूर्ण कराया गया। आज यह डबरी महज जल संग्रहण का ढांचा नहीं, बल्कि परिवार के समग्र विकास का केंद्र बन चुकी है।

​एक एकड़ खेती को मिला संजीवनी जल

​डबरी के निर्माण से हितग्राही की लगभग एक एकड़ कृषि भूमि को सीधा लाभ मिला है। खेत के ठीक पास ही जल स्रोत उपलब्ध हो जाने से वर्षा पर निर्भरता समाप्त हुई है। किसान अब अपनी जरूरत के अनुसार समय पर फसलों की सिंचाई कर पा रहे हैं, जिससे भूमि की उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ खेती अधिक सुव्यवस्थित और लाभप्रद हो गई है।

​बहुआयामी मॉडल: सिंचाई के साथ अब मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय

​संसाधनों के बहुआयामी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए हितग्राही ने डबरी में मछली बीज रोपण (मत्स्य पालन) की शुरुआत की है। सिंचाई के साथ-साथ मछली पालन जुड़ जाने से परिवार को नियमित कृषि उत्पादन के अलावा अतिरिक्त आय का एक नया और टिकाऊ जरिया मिल गया है।

​”एक डबरी – अनेक लाभ”

माटेगहन की यह पहल जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, कृषि सिंचाई और आजीविका संवर्धन का एक आदर्श संगम है। प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह का बहुउद्देशीय उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहा है।

​आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

​माटेगहन की यह सफलता की कहानी रेखांकित करती है कि जब स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से परिसंपत्तियों का निर्माण होता है, तो उसके परिणाम दूरगामी और परिवर्तनकारी होते हैं। जल बचा, खेत संवरे और आजीविका के नए रास्ते खुले—ईश्वर/नम्मु की यह आजीविका डबरी आज छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भरता का एक चमकता हुआ उदाहरण बन चुकी है।

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