बचपन में रिश्तेदार ताने देते थे कि यह परिवार की इज्जत खराब कर देगी। पिकनिक पर ले जाने से पहले सिर पर दुपट्टा रखने की शर्त रखी जाती थी और उन्हें तिरस्कार झेलना पड़ता था। लेकिन फरहाना भट्ट ने हार मानने के बजाय खुद को साबित किया। आठवीं कक्षा से उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाना शुरू कर दिया।