सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर डीएनए टेस्ट से साबित हो जाए कि कोई व्यक्ति बच्चे का बायोलॉजिकल पिता नहीं है, तो उससे बच्चे के भरण-पोषण का खर्च नहीं मांगा जा सकता।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए एक महिला की अपील खारिज कर दी। महिला ने अपनी बेटी को भरण-पोषण न मिलने के खिलाफ याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण तय करते समय स्पष्ट डीएनए साक्ष्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामले में याचिकाकर्ता महिला प्रतिवादी के घर में तीन साल तक घरेलू सहायिका के रूप में काम कर चुकी थी।