माले मालदीव इस समय अपने सबसे कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है। भारी अंतरराष्ट्रीय कर्ज और तेजी से घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण देश की अर्थव्यवस्था चरमराने की कगार पर है। इस बीच, मालदीव सरकार ने भारत से एक बार फिर करेंसी स्वैप सुविधा की अवधि बढ़ाने की गुहार लगाई है। हालांकि, भारत के लिए इस अनुरोध को स्वीकार करना कूटनीतिक और तकनीकी रूप से एक बड़ी चुनौती बन गया है।
मालदीव की वित्तीय स्थिति वर्तमान में बेहद चिंताजनक है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों, जैसे फिच ने इसकी सॉवरेन रेटिंग को सीसी पर रखा है, जो कर्ज चूक (डिफ़ॉल्ट) की उच्च संभावना की ओर इशारा करता है। देश पर अप्रैल 2026 में लगभग 1 अरब डॉलर के कर्ज भुगतान का दबाव था। हालांकि मालदीव ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड का उपयोग कर 500 मिलियन डॉलर के सुकुक बॉन्ड का भुगतान तो कर दिया है, लेकिन इस कदम ने उसके विदेशी मुद्रा भंडार को लगभग खाली कर दिया है। भारत ने हमेशा मालदीव की मुश्किल समय में मदद की है। अक्टूबर 2024 में भारत ने 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी थी, जिसे नियमों में ढील देते हुए पहले भी दो बार विस्तार दिया जा चुका है। इसके अलावा, भारत ने 50-50 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिलों की अवधि बढ़ाई