इस्लामाबाद। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी कर्ज के चौतरफा दबाव के बीच पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की जद्दोजहद के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर के कर्ज की पूरी अदायगी की मांग कर दी है। पिछले सात वर्षों में यह पहला मौका है जब यूएई ने कर्ज चुकाने की अवधि को आगे बढ़ाने या मोहलत देने से साफ इनकार कर दिया है। इस अप्रत्याशित मांग ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और देश के बाहरी वित्तीय सुरक्षा कवच पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक की बैठकों के दौरान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने स्वीकार किया कि यूएई के साथ कर्ज अदायगी की समय सीमा बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई है। इस कमी को पूरा करने के लिए अब पाकिस्तान वाणिज्यिक विकल्पों और अन्य देशों से नए कर्ज लेने पर विचार कर रहा है। हालांकि, वित्त मंत्री ने दावा किया कि मार्च के अंत तक पाकिस्तान के पास 16.4 अरब डॉलर का मुद्रा भंडार था, जो तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। उन्होंने भरोसा जताया कि