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आतंक के साए में कूटनीति, पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

आतंक के साए में कूटनीति, पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

ईरान | ईरान और अमेरिका के बीच बीते एक महीने से ज्यादा समय से जारी युद्ध कुछ दिन के लिए टल गया है। दोनों देशों के बीच हुए इस युद्ध विराम में पाकिस्तान, तुर्किये और मिस्र ने भी भूमिका निभाई है। अब आगे के समझौते के लिए ईरान और अमेरिका इस्लामाबाद में मिलेंगे। भले ही पाकिस्तान ने इस संघर्ष को रुकवाने के लिए लगातार ट्रंप प्रशासन और ईरानी शासन के बीच संदेशों का आदान-प्रदान किया, लेकिन यह युद्ध विराम भी सिर्फ अस्थायी ही है और दो हफ्तों के लिए तय किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उसके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के जिक्र के बाद कई तरह की चिंताएं जताई जा रही हैं।विश्लेषकों की तरफ से यह चिंता जताई गई है कि आखिर कैसे लंबे समय तक अपनी आतंकी गतिविधियों और आतंकवादियों के सुरक्षित पनाहगाह बने रहने की वजह से अलग-थलग हुआ पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दो देशों के बीच युद्ध विराम के लिए बातचीत का जरिया बन रहा है? वह भी तब जब इस युद्ध के बीच खुद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान पर हमलों के नाम पर वहां आम लोगों को निशाना बनाया है। आखिर डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार शासन में आने के बाद से ऐसा क्या-क्या हुआ है, जो पाकिस्तान के लिए फायदेमंद बन गया? आइये जानते हैं…

ट्रंप के फिर शासन में आने के बाद कैसे बढ़े अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते?

बीते करीब डेढ़ दशक से पाकिस्तान की बढ़ती आतंकी गतिविधियों और उसके आतंकियों के पनाहगाह बनने की वजह से यह देश लगातार वैश्विक परिदृश्य में अलग-थलग पड़ा था। खासकर अमेरिका में राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल से लेकर डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल और फिर जो बाइडन के नेतृत्व वाली सरकार में भी पाकिस्तान हाशिए पर ही रहा। हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में एक बड़ा और आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिला है। बताया जाता है कि रिश्तों में आई इस अप्रत्याशित गर्माहट के पीछे पा

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