नई दिल्ली। वैश्विक सेमीकंडक्टर और तकनीकी वर्चस्व की दौड़ में अमेरिका ने एक और आक्रामक कदम उठाया है। वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस के सीनेटरों ने चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों को एडवांस्ड चिप निर्माण तकनीक हासिल करने से रोकने के लिए एक नया विधेयक पेश किया है। ‘एमएटीसीएच’ एक्ट नामक इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य निर्यात नियंत्रण (एक्सपोर्ट कंट्रोल) की मौजूदा खामियों को दूर करना और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों के साथ नीतियों में तालमेल स्थापित करना है।
क्या है बिल का मकसद?
यह कानून केंद्र सरकार को सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट्स’ (व्यापार और आपूर्ति के प्रमुख मार्ग) की पहचान करने और मित्र देशों के साथ मिलकर एक समान एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू करने का निर्देश देता है। सीनेटर पीट रिकेट्स और एंडी किम द्वारा संयुक्त रूप से लाए गए इस बिल को सीनेटर जिम रिश और चक शूमर का भी समर्थन प्राप्त है। सीनेटर रिकेट्स के अनुसार, वर्तमान में लागू इकाई-आधारित प्रतिबंधों का ढांचा बिखरा हुआ है, जिसे चीन फ्रंट कंपनियों या बिचौलियों के माध्यम से आसानी से चकमा दे देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेमीकंडक्टर को डिजाइन करने और बनाने की क्षमता कम्युनिस्ट चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा के केंद्र में है। यह नया बिल इन खामियों को खत्म कर अमेरिकी कंपनियों के लिए एक समान अवसर तैयार करेगा।
‘एमएटीसीएच एक्ट’ के प्रमुख प्रावधान
यह बिल सीधे तौर पर ग्लोबल सप्लाई चेन और तकनीकी बाजार को प्रभावित करेगा। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
तकनीक और उपकरणों पर पाबंदी: एमएटीसीएच एक्ट में डीप अ