Google Analytics Meta Pixel
ककनार घाटी के नीचे थमा लाल आतंक का शोर

ककनार घाटी के नीचे थमा लाल आतंक का शोर

समाचार

अब गूंजती है बस की हॉर्न

रायपुर 02 अप्रैल 2026/* बस्तर की भौगोलिक विषमताओं और कठिन परिस्थितियों के बीच विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी गई है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी। ककनार घाटी के नीचे बसे सुदूर गांव कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम जो कभी वामपंथी आतंक के गढ़ माने जाते थे, आज मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। इन गांवों के निवासियों के लिए पक्की सड़क का निर्माण एक ऐसा सपना था, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था, क्योंकि घाटी की दुर्गम ढलान और माओवाद के साये ने विकास के हर रास्ते को अवरुद्ध कर रखा था। लेकिन आज उन्हीं संकरी पगडंडियों और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर बनी नई सड़क में बस का दौड़ना बस्तर की बदलती तस्वीर का सबसे सशक्त प्रमाण है। ज्ञात हो कि बस्तर जिले में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना की शुरूआत बीते 04 अक्टूबर 2025 को केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा की गई थी। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के माध्यम से जिले के चार चयनित मार्गों पर बस सेवा संचालित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के तहत शुरू हुई यह बस सेवा केवल एक वाहन नहीं, बल्कि विश्वास और विकास की एक कड़ी है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार रायपुर द्वारा स्वीकृत समय-सारणी के अनुसार यह बस प्रतिदिन कोण्डागांव जिले के मर्दापाल से अपनी यात्रा शुरू करती है और ककनार घाटी के नीचे बसे उन गांवों को जोड़ती है जहाँ कभी पैदल चलना भी जोखिम भरा था। घाटी के इन दुर्गम अंचलों से होते हुए बस धरमाबेड़ा और ककनार जैसे पड़ावों को पार कर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचती है। इससे उन लोगों का सफर अब सुगम हो गया है जिन्होंने दशकों तक केवल सड़क और बस का इंतजार किया था।

वामपंथी समस्या के कमजोर पड़ने और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के चलते अब इन संवेदनशील इलाकों में सड़कों का निर्माण संभव हो पाया है। पक्की सड़कों के इस जाल ने न केवल परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि ककनार घाटी के नीचे बसे ग्रामीणों के मन से अलगाव का डर भी खत्म कर दिया है। अब शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए ग्रामीणों को मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता। यह निरंतर बस सेवा इस बात का प्रतीक है कि बस्तर का वह हिस्सा जो कभी अंधेरे में खोया हुआ माना जाता था, अब पूरी रफ्तार के साथ प्रगति की राह पर अग्रसर है। घाटी की ऊंचाइयों से उतरकर यह बस आज हर ग्रामीण के घर तक शासन की योजनाओं और खुशहाली का संदेश पहुँचा रही है। इस बारे में चंदेला के सरपंच श्री तुलाराम नाग कहते हैं कि करीब दो साल पहले तक इस ईलाके में माओवादी समस्या के कारण विकास थम सी गई थी लेकिन आज सड़क बन जाने के साथ ही विकास को एक नई दिशा मिल चुकी है। इस ईलाके में स्कूल, आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र की सेवाओं के साथ ही उचित मूल्य दुकान में खाद्यान्न एवं अन्य जरूरी सामग्री सुलभ हो रही है वहीं समीपस्थ ग्राम ककनार में साप्ताहिक बाजार की रौनक देखते ही बनती है। क्षेत्र के ककनार सरपंच श्री बलीराम बघेल बताते हैं कि पहले उन्हे अपने तहसील मुख्यालय लोहण्डीगुड़ा और जिला मुख्यालय तक जाने मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब सड़क के बन जाने से बारहमासी आवागमन की सुविधा मिल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *