Google Analytics Meta Pixel
बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सिस्टम अपडेट करने का समय मिलेगा

बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सिस्टम अपडेट करने का समय मिलेगा

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूंजी बाजार एक्सपोजर से जुड़े संशोधित फ्रेमवर्क के लागू होने की समयसीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी है। अब ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 के बजाय 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। केंद्रीय बैंक का यह फैसला बैंकों, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) और उद्योग संगठनों से मिले फीडबैक के बाद लिया गया है। इन संस्थाओं ने नए नियमों को लागू करने में परिचालन और व्याख्यात्मक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया था।

किन क्षेत्रों में स्पष्टता प्रदान की गई?

आरबीआई ने इस फ्रेमवर्क के लिए 13 फरवरी 2026 को संशोधन निर्देश जारी किए थे, जो सार्वजनिक परामर्श के बाद तैयार किए गए थे। अब RBI ने अधिग्रहण वित्त , वित्तीय परिसंपत्तियों के खिलाफ ऋण और सीएमआई को दिए जाने वाले क्रेडिट एक्सपोजर जैसे क्षेत्रों में स्पष्टता भी प्रदान की है।

संशोधित नियमों में क्या खास?

संशोधित नियमों के तहत अधिग्रहण वित्त के दायरे को बढ़ाकर अब इसमें विलय और समामेलन को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इस तरह की फंडिंग केवल गैर-वित्तीय कंपनियों में नियंत्रण हासिल करने के लिए ही दी जाएगी, जिससे स्पष्ट है कि आरबीआई का फोकस केवल नियंत्रण आधारित सौदों पर है, न कि छोटे निवेशों पर। अगर लक्ष्य कंपनी एक होल्डिंग कंपनी है, तो बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित तालमेल सिर्फ मूल कंपनी ही नहीं बल्कि उसकी सभी सहायक कंपनियों में भी मौजूद हो।

कंपनियों के लिए अधिग्रहण वित्त नियमों में बदलाव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *