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चुनावी माहौल में स्थानीय मुद्दे बनाम बाहरी प्रभाव, ओवैसी और SIR की भूमिका पर चर्चा

चुनावी माहौल में स्थानीय मुद्दे बनाम बाहरी प्रभाव, ओवैसी और SIR की भूमिका पर चर्चा

कोलकाता। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ सिसायी उठापटक बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से उम्मीदवारों का एलान होने के साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में पश्चिम बंगला के चुनाव और वहां चुनावी मुद्दों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।

रामकृपाल सिंह: बंगाल में कोई एक मुद्दा नहीं है। बंगाल के लेबर फोर्स में उस तरह का असंतोष नहीं है। वोटर दो तरह का होता है एक मुझे क्या मिला और दूसरा हमें क्या मिला वाला वोटर। ओवैसी फैक्टर जिस तरह महाराष्ट्र, बिहार में चला है अगर वो बंगाल में चलता है तो वो असर करेगा। दूसरा एसआईआर में जो वोट कटेंगे वो भी असर डालेंगे।

पूर्णिमा त्रिपाठी: ममता के सामने चुनौती बहुत बड़ी है। तीन बार से लगाता ममता मुख्यमंत्री हैं। उनको अपने खिलाफ उत्तपन्न हुई सत्ता विरोधी लहर से भी निपटना होगा। दूसरा एसआईआर में जो नाम कटे हैं, उसका भी असर दो

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