नई दिल्ली|देश में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत साइबर अपराध से संबंधित लगभग 257 मामले सामने आए हैं। ईडी ने इन मामलों की जांच शुरू की है। इन केसों में मनी लॉंड्रिंग के जरिए 35925 करोड़ रुपये की ‘आपराधिक आय’ एकत्रित की गई है। प्रवर्तन निदेशालय और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के बीच संबंधित नोडल अधिकारियों के माध्यम से सूचना साझा करने/प्रसारित करने की एक स्थापित व्यवस्था है। इस व्यवस्था के तहत, ईडी और एलईए साइबर अपराध से संबंधित मामलों सहित सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’
डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी नेटवर्क के माध्यम से गबन किए गए धन की पहचान और वसूली सहित साइबर अपराधों से निपटने के तंत्र को व्यापक एवं समन्वित तरीके से मजबूत करने के लिए, केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संबद्ध कार्यालय के रूप में ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) की स्थापना की है। I4C के एक भाग के रूप में ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP) (https://cybercrime.gov.in) शुरू किया गया है। यहां पर जनता सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सकती है। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट की गई साइबर अपराध की घटनाओं को एफआईआर में परिवर्तित किया जाता है। उसके बाद की कार्रवाई, जैसे कि आरोप पत्र दाखिल करना, गिरफ्तारी और शिकायतों का समाधान, संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कानून के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।
8,690 करोड़ से अधिक की वित्तीय राशि बचाई
I4C के अंतर्गत ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ को वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया ग