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आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग से निर्यात को मिला बढ़ावा

आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग से निर्यात को मिला बढ़ावा

शिकागो। वैश्विक बाजार भू-राजनीतिक तनावों के कारण भारी उथल-पुथल का सामना कर रहे हैं। इस अस्थिरता के बीच भारत वैश्विक व्यापार के केंद्र में मजबूती से उभरा है। हाल ही में यूरोप के साथ हुआ अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता, जिसे मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स कहा जा रहा है, मुक्त व्यापार के नए रास्ते खोल रहा है। इसके साथ ही, अमेरिका-भारत के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने टैरिफ संबंधी बाधाओं को कम कर दिया है, जिससे अमेरिकी उत्पादों की भारत में पहुंच आसान होगी। हालांकि, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया, लेकिन यह स्पष्ट है कि मुक्त व्यापार का दौर करवट ले रहा है और दुनिया के कई देश अब भारत जैसे भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार तलाश रहे हैं।

भारत-चीन पर दुनिया की बढ़ती निर्भरता

पश्चिमी देशों के न्यूट्रास्यूटिकल्स (पोषण और स्वास्थ्य उत्पाद) बाजार के लिए भारत और चीन रीढ़ की तरह हैं, क्योंकि इन देशों में 80% से ज्यादा कच्चे माल की सप्लाई एशिया से ही होती है। जड़ी-बूटियों, मसालों और वनस्पतियों के अर्क इन सप्लीमेंट्स के अनिवार्य हिस्से हैं। सप्लाई चेन में आए हालिया उतार-चढ़ाव ने बाजार को काफी प्रभावित किया है। व्यापारिक पाबंदियों और भारी टैक्स से बचने के लिए अब कई एशियाई सप्लायर वियतनाम और श्रीलंका जैसे देशों में अपना विस्तार कर रहे हैं।

बाजार के दिग्गज

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