तेल विपणन कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। औद्योगिक उपयोग वाले थोक डीजल की दरें भी करीब 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गईं। तेल विपणन कंपनियों ने कीमतों में यह इजाफा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बाद किया है।
हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में प्रीमियम 95-ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत 99.89 रुपये से बढ़कर 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह, दिल्ली में थोक औद्योगिक डीजल की कीमतें 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर हो गईं। अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतें गुरुवार, 19 मार्च 2026 को 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, बाद में ये लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल पर वापस आ गईं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि प्रीमियम श्रेणी कुल पेट्रोल बिक्री का केवल दो से चार फीसदी है। सरकार आम आदमी पर कोई मूल्य वृद्धि का बोझ नहीं डालना चाहती है। तेल कंपनियां स्वतंत्र रूप से मूल्य निर्धारण का निर्णय लेती हैं। सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को विनियमित नहीं करती है।
पेट्रोल और डीजल का मूल्य निर्धारण क्रमशः 2010 और 2014 में विनियमित किया गया था। तब से तेल विपणन कंपनियां कीमतें तय करती हैं। सरकार वैश्विक तेल बाजारों की बारीकी से निगरानी कर रही है। फिलहाल खुदरा ईंधन कीमतें बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है। तेल विपणन कंपनियों से मौजूदा लागत दबाव को अवशोषित करने की उम्मीद है।
कंपनियों का मुनाफा और आयात पर असर?
खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियों ने नुकसान उठा