भारत के पैक्स सिलिका में शामिल होने से सबसे बड़ा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि चीन के एकाधिकार और आपूर्ति शृंखला की बाधाओं के कारण चिप की कीमतों में जो कृत्रिम उछाल रहता था, वह अब खत्म होगा। खनिजों की सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी आपूर्ति होने से चिप निर्माण की लागत कम होगी। इसका सीधा लाभ स्मार्टफोन, लैपटॉप से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक को मिलेगा, जिससे उनकी कीमतें कम होने का रास्ता साफ होगा। अमेरिका ने पैक्स सिलिका गठबंधन की रूपरेखा तैयार करते समय भारत को इसमें शामिल नहीं किया था। विशेषज्ञों का मानना था कि भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता अभी शुरुआती स्तर पर है। हालांकि, बीते दो वर्षों में भारत ने जिस तेजी से 10 सेमीकंडक्टर संयंत्र (एफएबीएस) स्थापित करने की ओर कदम बढ़ाए और 2 नैनो मीटर चिप डिजाइनिंग में महारत हासिल की, उसने अमेरिका सहित अन्य देशों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा के बिना वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा अधूरी है। भारत का इस समूह में आना यह सुनिश्चित करता है कि देश को कच्चे माल के लिए चीन का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।