ढाका,। बांग्लादेश में राजनीति से महिलाओं की भागीदारी खत्म होती जा रही है। बांग्लादेश के सियासी इतिहास के पन्नों पर दो ऐसे नाम दर्ज हैं, जिन्होंने देश को एक नई दिशा दी। बांग्लादेश की सियासत का इतिहास खालिदा जिया और शेख हसीना के नाम के बिना अधूरा है। इसके बावजूद आज यहां पर महिलाओं की भागीदारी खत्म होती जा रही है। बांग्लादेश में इस साल 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या ना के बराबर है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें सशक्त करने के वादे दशकों से किए जा रहे हैं, लेकिन फिर भी आगामी चुनाव में उनकी भूमिका की अलग तस्वीर नजर आ रही है। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक जमात-ए-इस्लामी समेत 30 से ज्यादा पंजीकृत राजनीतिक दलों ने कोई भी महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। 13वें संसदीय चुनाव में सभी उम्मीदवारों में महिलाओं की संख्या 4.5फीसदी से भी कम है। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है।