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टोक्यो से पेरिस तक चमका सितारा, खेल रत्न की दौड़ में हार्दिक सिंह

टोक्यो से पेरिस तक चमका सितारा, खेल रत्न की दौड़ में हार्दिक सिंह

देश के सबसे बड़े खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हुआ है. टोक्यो ओलंपिक 2021 और पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाली टीम में हार्दिक की भूमिका बेहद अहम रही थी. पिछले दो वर्षों में उनके लगातार शानदार प्रदर्शन को देखते हुए चयन समिति ने उनके नाम की सिफारिश की है.

पंजाब से निकला हॉकी का योद्धा
27 साल के हार्दिक सिंह पंजाब के खुसरोपुर गांव में पैदा हुए थे. हॉकी उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि विरासत है. उनके पिता वरिंदरप्रीत सिंह राय खुद हॉकी खिलाड़ी रहे हैं, जबकि दादा प्रीतम सिंह राय हॉकी कोच थे. हार्दिक ने दादा की कोचिंग में ही हॉकी की बुनियाद सीखी. उनके चाचा गुरमैल सिंह और जुगराज सिंह भी अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रहे हैं. खास बात यह है कि गुरमैल सिंह 1980 मॉस्को ओलंपिक में गोल्ड जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे.

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