रेत के समंदर के बावजूद! सऊदी-UAE क्यों मंगाते हैं ऑस्ट्रेलिया से रेत?

रेत के समंदर के बावजूद! सऊदी-UAE क्यों मंगाते हैं ऑस्ट्रेलिया से रेत?

सुनने में अजीब लग सकता है पर दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तानी देशों में गिने जाने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को रेत आयात करनी पड़ रही है. सवाल उठता है कि जब इन देशों के पास रेत की कोई कमी नहीं, तो आखिर बाहर से रेत लाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

दरअसल, सऊदी अरब के भविष्य के शहर, UAE की आसमान छूती इमारतें और अरबों डॉलर के मेगा प्रोजेक्ट्स जिस रेत की मांग करते हैं, वह आम नजर आने वाली रेगिस्तानी रेत से बिल्कुल अलग है. यही फर्क इन देशों को ऑस्ट्रेलिया जैसे दूर-दराज़ के देशों की ओर देखने पर मजबूर कर रहा है. आइए इसे विस्तार से समझते हैं |

रेगिस्तान की रेत क्यों फेल हो जाती है?

रेगिस्तानी रेत के कण इतने चिकने होते हैं कि वे सीमेंट के साथ ठीक से चिपक नहीं पाते. नतीजा यह होता है कि कंक्रीट कमजोर बनती है और भारी इमारतों का वजन सहन नहीं कर पाती. इसलिए ऊंची इमारतों, पुलों, मेट्रो और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में खास किस्म की रेत का इस्तेमाल जरूरी होता है |

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