नई दिल्ली। भारत (India) के उन्नत आकाश-एनजी मिसाइल (Akash-NG missile) के उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही इसके सेना और वायुसेना (Army and Air Force) में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। जानकारों की राय में नई पीढ़ी की सतह से हवा में वार करने वाली यह मिसाइल प्रणाली (Missile system) दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण बदलने की क्षमता रखती है। आकाश-एनजी प्रणाली तेज गति से आने वाले हवाई खतरों से निपटने में सक्षम है।
ध्वनि की गति से ढाई गुना अधिक रफ्तार से काम करने वाली इस मिसाइल प्रणाली की मारक क्षमता लगभग 60 किलोमीटर है। यह उन्नत संस्करण भारत की उत्तर और पश्चिम सीमाओं पर आधुनिक हवाई खतरों के खिलाफ एक शक्तिशाली कवच प्रदान करता है। आकाश-एनजी दुश्मन के स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे लो राडार क्रॉस सेक्शन वाले खतरों को सटीक निशाना बना सकता है।
2026 में होगी शामिल
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि परीक्षणों के दौरान आकाश एनजी मिसाइलों ने कम ऊंचाई व लंबी दूरी और अधिक ऊंचाई वाली परिस्तिथियों में हवाई लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता के साथ सफलतापूर्वक भेदा। परीक्षणों के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ-साथ वायुसेना के अधिकारी भी मौजूद रहे। डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत ने कहा कि इस सफल परीक्षण से आकाश-एनजी को सेनाओं में शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सूत्रों के मुताबिक अगले वर्ष तक यह मिसाइल प्रणाली वायुसेना में शामिल हो पाएगी।